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		<title>مجله علمی، خبری و آموزشی</title>
		<link>https://nin.kowsarblog.ir/</link>
		<description></description>
		<language>fa-IR</language>
		<docs>http://blogs.law.harvard.edu/tech/rss</docs>
				<item>
			<title>&#34; فایل های مقالات و پروژه ها – جدول ۴-۶- پیش بینی ترس از صمیمیت، بر اساس سبک های دلبستگی و سبک‏های پردازش هویت در پسران – 5 &#34;</title>
						<description>&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;
&lt;div id=&quot;story&quot; class=&quot;story&quot; data-id=&quot;1557179284&quot; data-words=&quot;711&quot;&gt;
&lt;div&gt;
&lt;p&gt;۴۹/۰۰۴/۰-&lt;strong&gt;هنجاری&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;۱۶/۰۴۰/۱۱/۰&lt;strong&gt;سردرگم-اجتنابی&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;با توجه به نتایج مندرج در جدول (۴-۵)، سبک های دلبستگی و سبک‌های پردازش هویت اثر معناداری بر ترس از صمیمیت در دختران داشته‏اند (۰۰۱/۰P&amp;lt;، ۱۲/۶=F). نتایج تحلیل رگرسیون نشان می‏ دهد که زیر مقیاس نزدیک بودن(۰۰۱/۰P&amp;lt;، ۲۳/۰- =β) و وابستگی (۰۰۱/۰P&amp;lt;، ۲۱/۰- =β)، به صورت منفی و معناداری ترس از صمیمیت را در دختران پیش ‏بینی می‏ کنند اما مؤلفه‌ اضطرابی نتوانسته است به صورت معناداری ترس از صمیمیت را در دختران پیش‌بینی کند. علاوه براین، هیچکدام از سبک های پردازش هویت نیز نتوانسته اند به صورت معناداری ترس از صمیمیت را در دختران پیش‌بینی کنند. لازم به ذکر است که مجموع متغیرهای پیش بین، ۱۷ درصد از واریانس ترس از صمیمیت را در دختران تبیین نموده اند.&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics-16.jpg&quot; /&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href=&quot;https://nefo.ir/&quot;&gt; &lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/THESIS-PAPER-13.png&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;جدول ۴-۶- پیش‌بینی ترس از صمیمیت، بر اساس سبک های دلبستگی و سبک‏های پردازش هویت در پسران&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;P&lt;/strong&gt; &lt;strong&gt;t&lt;/strong&gt; β &lt;strong&gt;R&lt;/strong&gt; &lt;strong&gt;P&lt;/strong&gt; &lt;strong&gt;F&lt;/strong&gt; &lt;strong&gt;متغیر های پیش بین&lt;/strong&gt; ۰۰۱/۰ ۶۳/۵ ۴۳/۰- ۳۱/۰ ۵۶/۰ ۰۰۱/۰ ۶۵/۱۰ &lt;strong&gt;نزدیک بودن&lt;/strong&gt; &lt;strong&gt;سبک های دلبستگی&lt;/strong&gt; ۳۰/۰ ۰۶/۱ ۰۹/۰- &lt;strong&gt;وابستگی&lt;/strong&gt; ۲۴/۰ ۱۸/۱ ۱/۰ &lt;strong&gt;اضطرابی&lt;/strong&gt; ۱۰/۰ ۶۷/۱ ۱۲/۰- &lt;strong&gt;اطلاعاتی&lt;/strong&gt; &lt;strong&gt;سبک های پردازش هویت&lt;/strong&gt; ۱۲/۰ ۵۵/۱ ۱۲/۰ &lt;strong&gt;هنجاری&lt;/strong&gt; ۱۱/۰ ۵۹/۱ ۱۲/۰ &lt;strong&gt;سردرگم-اجتنابی&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;نتایج مندرج در جدول (۴-۵) نشان می‏ دهد که سبک دلبستگی و سبک های پردازش هویت اثر معناداری بر ترس از صمیمیت در پسران داشته است (۰۰۱/۰P&amp;lt;، ۶۵/۱۰=F). نتایج تحلیل رگرسیون نشان می‏ دهد که زیر مقیاس نزدیک بودن (۰۰۱/۰P&amp;lt;، ۴۳/۰- =β) به صورت منفی و معنادار ترس از صمیمیت را در پسران پیش ‏بینی می ‏کند اما زیرمقیاس‏های وابستگی و اضطرابی و نیز سبک های پردازش هویت، نتوانسته اند به صورت معناداری ترس از صمیمیت را در پسران پیش‌بینی کنند. لازم به ذکر است که مجموع متغیر های پیش بین، ۳۱ درصد از واریانس ترس از صمیمیت را در پسران تبیین نموده اند.&lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Collins, Cooper, Albino &amp;amp; Allard ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Erikson ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Montgomery ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Marcia ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Berzonsky ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Identity processing styles ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Informational ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Normative ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Diffuse and avoidant ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;-Manne &amp;amp; Badr ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Hook, Gerstein, Detterich and Gridley ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Bartholomew ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Mikulincer, Florian and Tolmacz ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Vangilisti &amp;amp; Beck ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Boles ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Collins &amp;amp; Read ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Gittleman, Klein, Smider &amp;amp; Essex ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Clore and Byrne ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;-Social Exchange Theory ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;۳- Homans ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Interdependence Theory ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;۵- Kelley &amp;amp; Thibaut ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Fehr ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Equality Theory ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;-Traupmann ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Cognitive Consistency ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Developmental Theory ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Altman and Taylor ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Affection ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Expresivencess ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Compatibility ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Cohension ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;-Sexuality ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Conflict resolution ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Autonomy ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Identity ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Emotional intimacy ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Psychological intimacy ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Intellectual intimacy ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Intellectualization ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Role-Taking ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;-Empathy ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Sexual intimacy ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Physical intimacy ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Spiritual intimacy ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Aesthetic intimacy ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Social &amp;amp; Recreational intimacy ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Temporal intimacy ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Armsden &amp;amp; Greenberg ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;-Zimmerman &amp;amp; Becker- Stoll ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Terry ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Ditommaso, Mc Nulty, Ross &amp;amp; Burgess ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Smith, Morphy &amp;amp; Coat ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Koleva &amp;amp; Rip ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Franklin ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Guerreo &amp;amp; Jones ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Berk ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Bartholomew &amp;amp; Horowitz ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Fraley ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Spangler ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Levine &amp;amp; Miller ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Mussen, Kagan, Hustone &amp;amp; Conger ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Sigelman &amp;amp; Rider ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Slavin ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Bogaerts, Vanheule and Declercq ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Bermernton and Cappbell ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Weizman and Ancaram ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– William James ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Grotevant ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Glasser ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Self ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Baumeister ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Cooly ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Mead ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Winn ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Berk ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Schwartz ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Identity status ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;-Waterman ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Cote ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Kurtines ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Meuus ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Exploration ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Commitment ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Diffusion Identity ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Foreclosure Identity ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Moratorium Identity ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Achievement Identity ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;۱- Archer &amp;amp; Waterman ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Adams &amp;amp; Marsha ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Macek &amp;amp; Nurmi ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Berzonsky &amp;amp; Kinney ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Magai, Hunziker, Mesias &amp;amp; Culver ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Zilber &amp;amp; Goldstein ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Rognoni, Galati, Costa &amp;amp; Crini ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Cordova, Gee &amp;amp; Warren ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Dunham ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Suslow Dannlowski, Arolt &amp;amp; Ohrmann ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Sadikaj, Moskowitz &amp;amp; Zuroff ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Simpson ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Feeney &amp;amp; Noller ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Bpielage, Arrindell &amp;amp; Luteijn ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Ferrante ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Besharat ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Duriez &amp;amp; Soenens ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Li ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Vleioras ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;item_footer&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;small&gt;&lt;a href=&quot;https://nin.kowsarblog.ir/فایل-های-مقالات-و-پروژه-ها-n-جدول-۴-۶-پیش-بینی-ترس-از-صمیمیت&quot;&gt;مطلب اصلی&lt;/a&gt; در &lt;a href=&quot;http://kowsarblog.ir/&quot;&gt;کوثربلاگ &lt;/a&gt;ارسال شده است.&lt;/small&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;</description>
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							</item>
				<item>
			<title>&#34; فایل های دانشگاهی -تحقیق – پروژه – ج ـ اصل منع رفتار سوء استفاده گرانه – 10 &#34;</title>
						<description>&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;
&lt;div id=&quot;story&quot; class=&quot;story&quot; data-id=&quot;1557107962&quot; data-words=&quot;1175&quot;&gt;
&lt;div&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;‌در مورد اصل خودمختاری انتقاد شده است که تصمیم گیری های کاملاً خودمختارانه، حداقل در برخی موارد و زمانی که تصمیم گیری مستلزم مشورت می‌باشد، به نظر نادرست می‌آیند و ما را نسبت به اشتباهاتمان مسئول تر و پاسخ گوتر می نمایند.&lt;sup&gt;[۱۴]&lt;/sup&gt; انتقاد دیگر این که بر طبق نظر طرفداران اصل اتونومی که گفته اند: “تبعیت از رضایت بیمار یا تصمیم خودمختارانه ی وی، همواره، زندگی بیمار را بهتر می‌کند.”&lt;sup&gt;[۱۵]&lt;/sup&gt;، آنگاه ادعای طرفداران اتونومی، ادعای پوچی خواهد بود که می‌گویند اصل اتونومی متمایز از اصل سودرسانی است؛ زیرا اغلب جایگزین اصل خودمختاری می شود.&lt;sup&gt;[۱۶]&lt;/sup&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics_19_50.png&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در پاسخ به ایراد بالا، یکی از نویسندگان به جنبه ی دیگری از اصل فلسفی خودمختاری که برگرفته از روح نظریات اخلاقی امانوئل کانت است، اشاره نموده است.&lt;sup&gt;[۱۷]&lt;/sup&gt; کانت بیان می‌دارد اتونومی باید بر تصمیمات ما حکمفرما باشد؛ اعم از اینکه برای زندگی ما خوب یا بد باشد.&lt;sup&gt;[۱۸]&lt;/sup&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;https://elmifar.ir/&quot;&gt; &lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/%D9%84%D9%84%D8%A8.png&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;اصل مهم در این نظریه آن است که انسان، فی نفسه، هدف است و نبایستی صرفاً به عنوان ابزار هدف قلمداد گردد که خود به نوعی نفی شرافت و عزّت انسان است؛ کانت هر انسانی را دارای قدرت انتخاب آزاد می‌داند. البته بدیهی است که اصل اخلاقی خودمختاری در چارچوب زندگی اجتماعی، ارزش ها و فرهنگ های حاکم بر جامعه تفسیر و تحدید می شود.&lt;sup&gt;[۱۹]&lt;/sup&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بدین ترتیب اصلی که در نظریّه ی ارسطویی به طور دقیق توصیف نشده بود، در قرن هجده میلادی مورد توجه نظریّه پردازان قرار می‌گیرد. در این نوع از نظریّه های فلسفی که مبنای آن ها استقلال انسان است نظیر نظریّه ی کانت، تأکید بر حقّ فرد است در مقابل حقّ جامعه و رفاه فرد بر رفاه عمومی مرجّح است.&lt;sup&gt;[۲۰]&lt;/sup&gt; مطابق فرضیّه ی کانت، انسان قادر است آزادانه و آگاهانه انتخاب کند و همین انتخاب است که به انسان ارزش می‌دهد و آنچه که فی نفسه ارزشمند باشد دارای اعتبار و سزاوار احترام است و چنین نتیجه می‌گیرد که عدم توجّه به انتخاب آزادانه و آگاهانه ی افراد که مستلزم نادیده گرفتن شأن، کرامت ذاتی، استقلال و خودمختاری آنان است، به لحاظ اخلاقی اشتباه و مردود است. بر همین مبنا در قلمرو اخلاق پزشکی، اصل احترام به افراد ایجاب می‌کند که بیمار امکان انتخاب داشته باشد و کسب رضایت آگاهانه از بیماران برای حفظ استقلال و خودمختاری آنان ضروری دانسته شده است. خودمختاری به معنی حقّ تصمیم گیری آزادانه ی بیماران ‌در مورد اقدامات پزشکی مربوط به آن ها‌ است؛ هیچ بیماری را نمی توان به پذیرش درمان وادار کرد؛ به عبارت دیگر اصل احترام به استقلال و تصمیم گیری آزادانه و آگاهانه ی بیمار، بیانگر آن است که پزشک نمی تواند به اجبار، درمانی خاص را تحمیل کند و مستلزم آن است که پزشکان در شرایط عادی، از مداخله ی بدون رضایت، خودداری ورزند و در عوض تلاش نمایند تا بیماران را برای اتّخاذ تصمیم مناسب، تشویق و راهنمایی نمایند.&lt;sup&gt;[۲۱]&lt;/sup&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;از آنجا که حرکت اولیّه در جهت کسب رضایت آگاهانه، در اواسط قرن بیستم میلادی باعث به وجود آمدن نگرانی هایی برای پزشکان شد؛ مثلاً اینکه ارائه ی اطّلاعات بیشتر، بیماران را مضطرب یا سردرگم می‌کند یا باعث اتّخاذ تصمیماتی می شود که ممکن است منافع درمانی آنان را به بهترین نحو تأمین نکند یا حسّ اعتماد آنان را نسبت به پزشکشان تضعیف نماید؛&lt;sup&gt;[۲۲]&lt;/sup&gt; نگاهی به تاریخچه ی روند کسب رضایت، نشان دهنده ی یک سیر تکاملی در درک این مطلب است که چطور منافع بیماران، به بهترین نحو، تأمین شود، بدون آنکه به رابطه ی پزشک ـ بیمار صدمه ای وارد گردد.&lt;sup&gt;[۲۳]&lt;/sup&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در دفاع از نظریه ی کانت به عنوان مبنای رضایت بیمار و مبنای تعهد اخلاقی پزشک مبنی بر احترام به خودمختاری بیمار گفته شده است: “هر انسانی، موجودی است دارای عزت و کرامت منحصر به خود و غایت است؛ در نتیجه در هر رابطه ای، ایستادن در برابر خواست انسان، مستلزم آن است که هیچ انسانی در دنبال کردن مسیر درک خود از سعادت، به روشی که به نظر او بهترین راه است، آزاد نباشد.”&lt;sup&gt;[۲۴]&lt;/sup&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;اگرچه این جنبه از اصل اخلاقی اتونومی نیز از تیررس انتقادات مصون نمانده است، امّا همچنان به عنوان یک مبنای معتبر در توجیه حقّ رضایت بیماران، در اکثر کشورها، به ویژه کشورهای تابع نظام حقوقی کامن لا، جایگاه خود را حفظ نموده است.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;یکی از انتقادات این است که گفته شده است که مخالفت با تصمیم گیری های بیمار، همیشه به معنی مخالفت با تصمیم گیری خودمختارانه ی بیمار نیست؛ مثلاً یک بیمار بزرگسال دارای صلاحیت تصمیم گیری، از یک مداخله ی پزشکی فوری و مفید، اما نه اورژانسی، به دلیل سوء برداشت از حقایق پزشکی امتناع می‌کند و فرصتی برای متقاعد کردن وی وجود ندارد؛ از آنجا که این فرد ناآگاه بوده است، نمی توان گفت تصمیمش مبتنی بر اصل خودمختاری بوده است و اقدام بر خلاف تصمیم وی نقض اتونومی محسوب نمی شود.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بر این اساس یکی از نویسندگان چنین می‌گوید: “اقدامات اجباری در موارد مشابه بالا، قانونی و اخلاقی است و مخالف با اتونومی نیست؛ زیرا در این گونه موارد در واقع با یک تمایل عقلانی خودمختارانه&lt;sup&gt;[۲۵]&lt;/sup&gt; مخالفت نشده است بلکه با یک تمایل احساسی محض&lt;sup&gt;[۲۶]&lt;/sup&gt; مخالفت شده است و ‌به این دلیل حقّ ممانعت افراد، از اقدام مضر علیه خود وجود دارد؛ مشروط بر اینکه اساساً اقدام بیمار را بتوان یک اقدام غیرداوطلبانه تلقّی کرد.”&lt;sup&gt;[۲۷]&lt;/sup&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;همچنین نویسنده ی دیگری چنین می‌گوید:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;“گاهی نادیده گرفتن اتونومی بیمار می‌تواند اثر مثبت داشته باشد و این زمانی است که یک گزینه ی انتخابی از بیمار سلب می شود و حتی بیمار را قادر به انتخاب های آزادانه ی مهمتری می‌کند؛ مثلاً سلب اختیار اتانازی داوطلبانه از بیمار.”&lt;sup&gt;[۲۸]&lt;/sup&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;انتقاد دیگری که در زمینه ی اتونومی مطرح است اینکه مثلاً بیماری منصفانه درمان شده است و آگاهی ساده از درمان و روش های جایگزین برای اتخاذ تصمیم مستقل به وی ارائه شده است که اگر سعی می کرد، می‌توانست اطلاعات را درک کند؛ اما قصور او در درک اطلاعات، نتیجه ی غفلت خود او بوده است؛ آیا در این مثال می توان پزشک را به سبب انتخاب غیر خودمختارانه ی فرد مورد سرزنش قرار داد؟&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;برخی در پاسخ گفته اند که در اینجا تصمیمات مبتنی بر عدم درک بیمار مسؤولیتی برای پزشک ایجاد نمی کند.&lt;sup&gt;[۲۹]&lt;/sup&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;علی‌رغم این تنش ها روند رضایت آگاهانه به عنوان یک نماد ضروری از احترام به اتونومی افراد، به جهت تأمین منافع بیماران، مورد پذیرش قرار گرفت؛ زیرا در واقع رویکرد اصلی در سیاست های اخلاق پزشکی و نظریّه های فلسفی، آن است که چطور می توان به بهترین شکل ممکن، استقلال افراد را مورد حمایت قرار داد.&lt;sup&gt;[۳۰]&lt;/sup&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;نهایتاًً اینکه با وجود پذیرش اصل اتونومی بیماران، هنوز در عمل در برخی جوامع که در آن ها رضایت بیمار ضروری است، آنچه به آن پرداخته نمی شود، کیفیت انتخاب&lt;sup&gt;[۳۱]&lt;/sup&gt; است؛ یعنی اینکه تصمیم گیری مستقل چگونه است و آیا به شخص فرصت انتخاب با آن کیفیت داده شده است یا خیر؟&lt;sup&gt;[۳۲]&lt;/sup&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ج ـ اصل منع رفتار سوء استفاده گرانه &lt;/strong&gt;&lt;sup&gt;[۳۳]&lt;/sup&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;مبنای فلسفی- اخلاقی دیگری که در نظام حقوقی کامن لا برای دفاع از ضرورت رضایت بیمار مطرح شده است اصل منع رفتار توهین آمیز است؛&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;این اصل مانند سپری در مقابل ارتکاب جرایمی از قبیل تهدید، ضرب و جرح، تجاوز، فریب و اجبار، از بیمار حفاظت می‌کند.&lt;sup&gt;[۳۴]&lt;/sup&gt;&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;item_footer&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;small&gt;&lt;a href=&quot;https://nin.kowsarblog.ir/فایل-های-دانشگاهی-تحقیق-n-پروژه-n-ج-ـ-اصل-منع-رفتار-سوء-استفاده-گرانه&quot;&gt;مطلب اصلی&lt;/a&gt; در &lt;a href=&quot;http://kowsarblog.ir/&quot;&gt;کوثربلاگ &lt;/a&gt;ارسال شده است.&lt;/small&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;</description>
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							</item>
				<item>
			<title>&#34; فایل های دانشگاهی -تحقیق – پروژه | قسمت 34 – 4 &#34;</title>
						<description>&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;
&lt;div id=&quot;story&quot; class=&quot;story&quot; data-id=&quot;1557150275&quot; data-words=&quot;1205&quot;&gt;
&lt;div&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در انگلیس، در صورتی که خریدار به تعهد عمل ننماید ، بایع در صورتی که این نقض جنبه اساسی داشته باشد حق فسخ دارد&lt;sup&gt;[۲۷۲]&lt;/sup&gt; . در UCC به همین شکل است . در انگلیس اصرار خریدار در عدم پرداخت ثمن در صورت مطالبه بایع ، نقض اساسی می‌باشد&lt;sup&gt;[۲۷۳]&lt;/sup&gt; . در کشور ما ابتدا الزام و اجبار ، سپس فسخ وجود دارد، البته در قانون مدنی استثنائاتی در این خصوص وجود دارد، از جمله ماده ۴۰۲ قانون مدنی .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/zyro-image.png&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در انگلیس، در امتناع خریدار از اجرای تعهدات ، مقرراتی در فسخ یک جانبه توسط فروشنده وجود ندارد، ولی فسخ خریدار در امتناع فروشنده از اجرای تعهدات وجود دارد&lt;sup&gt;[۲۷۴]&lt;/sup&gt; . در UCC به همین صورت است و آثاری را پس از فسخ ، برای خریدار و فروشنده در نظر گرفته است . در کشور ما ، آثار فسخ را در مواد گوناگون قانون مدنی در مباحث اجاره ، بیع و قواعد عمومی تعهدات می توان مشاهده نمود . ‌در مورد مطالبه خسارات که از آثار فسخ می‌باشد ، قواعد عمومی مسئولیت ناشی از عدم اجرای تعهدات آن را امکان پذیر می‌داند ، مگر خود متعهدله سبب عدم انجام تعهد و فسخ شده باشد، یا عللی خارج از حیطه اقتدار متعهد سبب فسخ شود ، جمع بین فسخ و خسارت را ماده ۳۸۶ قانون مدنی بیان نموده است .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;https://nefo.ir/&quot;&gt;&lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/THESIS-PAPER-5.png&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در انگلیس، هر گاه قیمت مبیع در قرارداد مشخص نشده باشد ، قرارداد صحیح و خریدار قیمت متعارف را می پردازد، در UCC قرارداد صحیح و قیمت متعارف در زمان تسلیم مبیع باید پرداخته شود . در کشور ما با توجه به مواد ۲۱۶ ، ۳۱۹ و ۳۴۲ قانون مدنی عدم تعیین قیمت در قرارداد ،‌ معامله را غرری و باطل می گرداند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در انگلیس، نقض تعهدات در صورتی سبب حق فسخ می‌گردد ، که جنبه اساسی داشته باشد&lt;sup&gt;[۲۷۵] &lt;/sup&gt;. در UCC به همین صورت است . در کشور ما همین که حق فسخ به موجب قوانین و مقررات ایجاد گردد ، تفاوتی در نقض اساسی و غیر اساسی ندارد و نیازمند حکم دادگاه نمی باشد ، با اراده صاحب حق صورت می‌گیرد .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در انگلیس، ‌در مورد فسخ تعهدات، تعهداتی که تا زمان فسخ انجام نشده اند ، ملزم به آن نیستند&lt;sup&gt;[۲۷۶] &lt;/sup&gt;و تعهداتی که بعد از فسخ می‌باشند ، از بین نمی روند و وجود دارند&lt;sup&gt;[۲۷۷]&lt;/sup&gt; ، تعهدات مربوط به جبران خسارات در اثر نقض از بین نمی روند&lt;sup&gt;[۲۷۸] &lt;/sup&gt;. در کشور ما در تعهدات مستمر ، اثر فسخ مربوط به آینده می‌باشد و به گذشته اثر ندارد . در غیر مستمر فسخ تعهدات را بین می‌برد ، اما آثار گذشته را از بین نمی برد .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در انگلیس، نقض فرضی و احتمالی تعهدات در آینده وجود دارد&lt;sup&gt;[۲۷۹]&lt;/sup&gt; . اگر خریدار یا فروشنده فعلی مرتکب گردد که نشان دهد قصد انجام تعهد ندارد&lt;sup&gt;[۲۸۰] &lt;/sup&gt;، طرف متضرر می‌تواند قرارداد را فسخ و جبران خسارات وارده را نماید، یا قرارداد را الزام آور و منتظر زمان اجرای تعهد بماند&lt;sup&gt;[۲۸۱]&lt;/sup&gt; . در UCC به همین طریق مقرراتی وجود دارد، در کشور ما عنصر زمان اهمیت دارد و تا زمان اجرای تعهد فرا نرسد ، فسخ یا خسارت به علت نقض احتمالی ، وجود ندارد و دیر شدن و نقض در تعهدات ، ‌سبب مسئولیت می‌باشد ( مواد ۲۱۹ ، ۳۴۸ ، ۲۳۹ ، ۲۴۰ ، ۳۸۰ و ۳۷۰ قانون مدنی )&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در ایران و انگلیس در صورتی که تعهد صحیحاً منعقد شده باشد ، شرط مؤثر و الزام آور است و در غیر این صورت شرط به تبع تعهد باطل است ( مواد ۲۳۲ و ۲۳۳ قانون مدنی)، در صورتی که تعهد موضوع آن تأدیه وجه نقد باشد ، بر اساس مواد ۲۲۸ و ۲۲۱ قانون مدنی محکمه عمل می کند و در تعیین خسارات در تعهد ، بر اساس مواد ۲۳۰ قانون مدنی و ۱۵ قانون آیین دادرسی مدنی مصوب ۱۳۷۹ محکمه حق تغییر در آن ندارد .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در ایران در گرفتن خسارات عدم النفع با توجه به حقوق تطبیقی ، آرای دادگاه های انگلستان ، مواد قانون مدنی و آیین دادرسی مدنی اختلاف نظر وجود ندارد، ولی در ضرر و زیان ناشی از آن اختلاف نظر وجود دارد و قابل مطالبه نیست ( ماده ۳۲۰ قانون مدنی و ۵۱۵ قانون آیین دادرسی مدنی )، گرفتن خسارت از خسارت در ایران پذیرفته نیست و خسارت عدم پرداخت خسارت تأخیر تأدیه از این قبیل می‌باشد .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در ایران ابتدا باید اصل تعهد مطالبه ، سپس خسارات را مطالبه نمود و در تلاش برای کاهش خسارات توسط متعهدله قاعده اقدام وجود دارد . در تصریح به جبران خسارات در تعهد بر اساس ماده ۱۰ قانون مدنی باید به آن پایبند باشند، گاهی در تعهد این امر ذکر نمی شود ، اما عرف آن را قبول دارد که به معنای تصریح در تعهد می‌باشد .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در انگلیس اگر میزان خسارت جنبه تنبیه داشته و تخمین صادقانه ضرر نباشد قابل اجرا نیست، در ایران قابل اجرا می‌باشد و اصل آزادی اراده آن را می پذیرد .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در ایران ، ابتدا ایفای عین تعهد ، سپس خسارات مطالبه می شود ولی در انگلستان این گونه نمی باشد . در حقوق انگلیس ، عدم النفع صراحتاً پیش‌بینی شده است، اما در ایران ‌در مورد عدم النفع اختلاف نظر وجود دارد و خسارت از خسارت و خسارت ناشی از عدم النفع قابل مطالبه نمی باشند .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در ایران تعهدات نسبت به طرفین اثر دارد و این به معنای عدم قابلیت استناد در برابر اشخاص ثالث نمی باشد ( ماده ۲۳۱ قانون مدنی ) .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در ایران در تعهد به نفع و یا ضرر ثالث قوانین ساکت اند ، دکترین حقوقی مورد تعهد را توسط ثالث از متعهدله قابل مطالبه می دانند و برخی هم معتقدند ثالث گاهی طلبکار ، گاهی منتفع می‌باشد، در صورت طلبکار بودن و کشف قصد و اراده طرفین در این خصوص در تعهد ، می شود آن را مطالبه نماید .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در ایران تعهد به نفع ثالث به هر سه شرط صفت ، نتیجه و فعل امکان پذیر است، اما بیشتر شرط فعل می‌باشد . در تعهد به نفع ثالث ، متعهدله می‌تواند آن را از متعهد مطالبه و او را اجبار به انجام آن نماید .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در ایران نمی توان تعهدی که شرطی به نفع ثالث شده اقاله نمود ، چون به حق او لطمه وارد می شود.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ثالث می‌تواند الزام متعهد و جبران خسارات را از او ، با توجه به شرایطی که ذکر شد بخواهد . ولی در انگلیس این گونه نیست . در ایران اصل ۳۴ قانون اساسی و ماده ۹۵۹ قانون مدنی بیان می‌دارد : هیچ کس نمی تواند چه طرفین تعهدات ، چه ثالث ، حق دادخواهی و اقامه دعوی را از خود سلب نمایند و چنین شرطی باطل و الزام آور نمی باشد ، اما در انگلستان چنین امری قابل قبول می‌باشد .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در انگلیس، اصل حاکمیت اراده در انتقال ضمان است و در عدم توافق ضمان تابع از ملکیت می‌باشد و با انتقال ملکیت ضمان انتقال می‌یابد ، هر چند مبیع هنوز به مشتری تسلیم نگردیده باشد&lt;sup&gt;[۲۸۲] &lt;/sup&gt;، در UCC تقریباً همین راه حل انگلیس مورد قبول واقع شده است و بایع در صورتی نسبت به عیب و نقص مبیع مسئول می‌باشد که قبل از انتقال به مشتری ، در مبیع وجود داشته باشد&lt;sup&gt;[۲۸۳] &lt;/sup&gt;. در ایران ماده ۳۸۷ قانون مدنی به آن پرداخته و انتقال ضمان با تسلیم مبیع می‌باشد ، هر چند مالکیت با انعقاد قرارداد انتقال می‌یابد&lt;sup&gt;[۲۸۴]&lt;/sup&gt;.&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;
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							</item>
				<item>
			<title>&#34; پایان نامه آماده کارشناسی ارشد – ۳-۲- طرح تحقیق: – 9 &#34;</title>
						<description>&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;
&lt;div id=&quot;story&quot; class=&quot;story&quot; data-id=&quot;1557083673&quot; data-words=&quot;1028&quot;&gt;
&lt;div&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در عمل بازی درمانی شناختی-رفتاری اغلب شامل یک مدل سازی ترکیبی است زیرا مدل سازی یک راه مؤثر برای به دست آوردن، تحکیم کردن یا ضعیف کردن رفتارها است. یادگیری از طریق مدل سازی یک راه مؤثر و کارآمد برای کودکان به منظورکسب مهارت ها و رفتارهای جدید است. همچنان که درمان پیشرفت می‌کند، مدل رفتارها و فرآیندهای تفکر سازگارانه­تر، را رشد می­دهد و کودک را قادر می‌سازد تا آن ها را به مجموعه­ رفتاری خویش پیوند دهد. این مدل سازی می‌تواند به طور مؤثری برای کودکان سنین پیش دبستانیموثر واقع شود و به درمانگر امکان می‌دهد که توجه خود را متمرکز کند تا مطمئن شود که مدل به لحاظ سطح رشدی متناسب است( بندورا&lt;sup&gt;[۱۳۵]&lt;/sup&gt;، ۱۹۷۷؛ به نقل از نل،۱۹۹۸).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics_19_50.png&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;https://shivadanesh.ir/&quot;&gt; &lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/S-11.png&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در بازی درمانی شناختی-رفتاری نسبت به سایر بازی درمانی ها برای کودکان بر درگیر ساختن کودک در درمان بیشتر تأکید می شود. در این خصوص شش خصوصیت ویژه مرتبط با این نوع بازی درمانی وجود دارد:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۱-این نوع بازی درمانی، کودک را در فرایند درمان درگیر می‌کند، کودک یک شرکت کننده­ فعال است، ‌بنابرین‏ موضوعات مقاومت و عدم پذیرش می‌تواند مرتفع شوند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۲- این نوع بازی درمانی متمرکز بر افکار، احساسات، تخیلات و محیط کودک است. ‌به این ترتیب، تمرکز یافتن بر ترکیبی از موضوعاتی شبیه وسواس آلودگی، فوبی، و … به اندازه­ احساسات کودک در خصوص مشکل، ممکن است.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۳- این نوع بازی درمانی، یک یا چند نوع استراتژی برای رشد و توسعه افکار و رفتارهای سازگارانه تر را فراهم می­ نماید. کودک به راهکارهای جدیدی برا مقابله با موقعیت ها و احساسات می اندیشد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۴- این نوع بازی درمانی نسبت به بازی آزاد، ساختار یافته، مستقیم و هدفدار است. درمانگر با کودک و خانواده برای دست یابی به اهداف کار می‌کند و به کودک کمک می‌کند که برای دست یابی ‌به این اهداف تلاش نماید.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۵- این نوع بازی درمانی، که تکنیک هایی را ازلحاظ آزمایشی به اثبات رسیده اند را با یکدیگر ترکیب می‌کند. برای مثال، الگو سازی رفکار با بهره گرفتن از ‌عروسک‌های خزی و اسباب بازی هایی که توسط درمانگر به کار برده می­شوند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۶- این نوع بازی درمانی اجازه­ی آزمایش تجربی از درمان را فراهم ‌می‌آورد وتکنیکهای استفاده شده می ­توانند ارزیابی شوند. و توضیح می­دهد که چه درمانی، با چه کسی، برای این فرد و با این مشکل ویژه اثر بخش­تر است( کاتاناچ، ۲۰۰۹).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;مزایای بازی درمانی وبازی درمانی شناختی-رفتاری&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;فری&lt;sup&gt;[۱۳۶]&lt;/sup&gt;(۲۰۰۹)، در بررسی ویژگی ها و مزایای بازی درمانی و بازی درمانی شناختی رفتاری چنین عنوان می­ کند که بازی درمانی یک مدل مؤثر برای تعامل با درمانجویان در تمام سنین با دیدگاه های درمانی نظری مختلف ‌می‌باشد. بازی درمانی با زبانی بیانگر و پذیرا به افراد کمک می­ کند. بازی، زبان کودک است اما برخی اوقات زبان نوجوانان و بزرگسالان نیز ‌می‌باشد. بیشتر نوشته ها درباره بازی درمانی شناختی-رفتاری بر کودکان پیش دبستانی متمرکز است. این نوشته ­ها سطح رشد این کودکان و تناسب شیوه ­های بازی درمانی با رده­ی سنی آن ها را نشان می&lt;sub&gt;­&lt;/sub&gt;دهد.وقتی بزرگسالان در سطح رشدی-شناختی­شان هستند. این غیر همزمانی رشد در افراد، بازی درمانی را برای درمانجویان در تمام سنین مؤثر می&lt;sub&gt;­&lt;/sub&gt;کند)احمدی، ۱۳۸۹).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بعلاوه این نوع بازی درمانی برای تمام درمانجویان مقاوم در همه سنین مؤثر است. پیش دبستانی ها و همچنین نوجوانان و بزرگسالان ممکن است نسبت به گفتگوی درمانی سنتی مقاومت نشان دهند، ‌به این علت که قبلا مورد سو استفاده قرار ‌گرفته‌اند یا آموزش دیده اند که اطلاعات خاصی را به کسی نگوید، و یا سیستم عقیدتی خاصی دارند که تاثیر درمان را مخدوش می­ کند. این ها تنها معرفی تعداد کمی از دلایل مقاومت است. همینطور، این نوع بازی درمانی می‌تواند برای درنمانجویان در تمام سنین بسیار مفید باشد. درمانجویان درتمام سنین اغلب مشکلاتشان را انکار می‌کنند. متخصصین بالینی اغلب با درمانجویانی سروکار دارند که از لحاظ روانشناسی از اینکه چه جیزی باعث پریشانی آن ها می شود ناآگاهند. این مسئله به ویژه برای کودکان کوچکتر و پیش دبستانی نیز صحت دارد، اغلب برای نوجوانان و بزرگسالان نیز صحیح است. یک دانش ­آموز کلاس پنجم که ممکن است نداند سواستفاده­های فیزیکی در خانه یک شیوه­ نامناسب تربیتی است و آن را عادی تلقی می­ کند، در درمان آن را ذکر نمی­نماید. از طریق بازی درمانی شناختی-رفتاری و استفاده از نقاشی ها، خاک رس، یا کتاب درمانی این مسائل اغلب ظاهر می­شوند، ‌بنابرین‏ به درمانگر و درمانجو، در کشف راه های جدید برای درمان کمک می­ کند( فری، ۲۰۰۹؛ به نقل از احمدی، ۱۳۸۹).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;اثربخشی بازی درمانی شناختی-رفتاری، اغلب به درمانجویانی نسبت داده می­ شود که بنابر شرایط مختلف از لحاظ کلامی دچار مشکل هستند. یک درمانجوی بزرگسال ممکن است از نظر رشدی تأخیر داشته باشد. یک درمانجوی مدرسه ای، می ­تواند گنگی انتخابی داشته باشد. درمانجویان بزرگتر از سنین پیش دبستانی ممکن است از استرس پس از سانحه رنج ببرند و زمان صحبت درمورد آسیب ها از لحاظ کلامی مشکل داشته باشند. تمام این درمانجویان می ­توانند از مزایای این نوع بازی درمانی بهره ببرند. با این وجود، برخی درمانجویان بزرگتر می ­توانند به خوبی با گفتگوی درمانی سنتی، دغدغه­ های خود را بیان کنند، اما برخی اوقات دچار تنگنا می­شوند. اینجا است که بازی درمانی شناختی-رفتاری می ­تواند مفید باشد. شاید درمانجو بتواند ناخشنودی­اش را در خصوص برخی مسائل آشکارا مطرح کند، اما مسائل جنسی را نمی­تواند. این نوع بازی درمانی همچنین می ­تواند برای طرح مسائل پیش‌بینی نشده، فرصتی را فراهم می­ کند که گفتگوی درمانی سنتی نمی­تواند. اغلب درمانگران آنچنان بر اهداف درمانی تمرکز ‌می‌کنند که از دغدغه های دیگری که ممکن است درمانجو داشته باشد و قبلا در برنامه درمانی منظور نشده، غافل می­مانند. در واقع کاربرد بازی درمانی شناختی-رفتاری منحصر به پیش دبستانی نیست، بلکه درمانجویان در سنین ۲ تا ۹۰ سال را ‌می‌توان شامل گردد. شیوه ­های بازی درمانی شناختی-رفتاری برای مقابله با دغدغه هایی نظیر خشم، اضطراب، کمال گرایی، پرخاشگری، جدایی، مهارت های اجتماعی، سواستفاده و اعتماد به نفس ارائه می­ شود. تحقیقات مختلف کاربرد های این نوع بازی درمانی را برای درمانجویان در تمام سنین نشان می­دهد( فری، ۲۰۰۹؛ به نقل از همان منبع).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;فصل سوم&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;روش پژوهش&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;۳-۱- مقدمه:&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در این فصل، روش پژوهش، جامعه ی آماری، نمونه، روش نمونه گیری و حجم نمونه، ابزار پژوهش، روش گردآوری داده ها و روش تجزیه و تحلیل داده ها مورد بررسی قرار می‌گیرد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;h1&gt;۳-۲- طرح تحقیق:&lt;/h1&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;item_footer&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;small&gt;&lt;a href=&quot;https://nin.kowsarblog.ir/پایان-نامه-آماده-کارشناسی-ارشد-n-۳-۲-طرح-تحقیق-nn9&quot;&gt;مطلب اصلی&lt;/a&gt; در &lt;a href=&quot;http://kowsarblog.ir/&quot;&gt;کوثربلاگ &lt;/a&gt;ارسال شده است.&lt;/small&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;</description>
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							</item>
				<item>
			<title>&#34; مقالات و پایان نامه ها | بند دوم : اصل آزادی قراردادی در بازفروش اجباری – 9 &#34;</title>
						<description>&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;
&lt;div id=&quot;story&quot; class=&quot;story&quot; data-id=&quot;1557089413&quot; data-words=&quot;1263&quot;&gt;
&lt;div&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بر اساس اصل آزادی قراردادها ، طرفین در انتخاب و مشخص کردن تخلفاتی که منجر می شود یک طرف از حق بازفروش کالا برخوردار گردد آزاد می‌باشند ، البته با توجه ‌به این که قانون‌گذار چنین حقی را به صورت صریح در قانون پیش‌بینی نکرده ، باید مواردی را که منجر می شود یکی از طرفین از حق بازفروش برخوردار شود به صراحت در قرارداد شمارش شود و نباید به طور کلی ، فقط قید گردد که حق بازفروش برای هر تخلفی به کار می رود .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics_7_50.png&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;https://fekreshad.ir/&quot;&gt; &lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/S-8.png&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بازفروش اختیاری نوعی ضمانت اجرا می‌باشد ، وجود این ضمانت اجرا هیچ تعارضی با دیگر ضمانت اجرا ها ندارد ، چرا که در این جا نوعی ضمانت اجرای قراردادی به ضمانت اجراهای قانونی اضافه شده است که به نظر نمی رسد وجود این ضمانت اجرا منکر یا محدود کننده ضمانت اجرا های دیگر باشد . ضمناً وجود ضمانت اجرا های قانونی مقتضای ذات بیع نمی باشند که بازفروش در صورت نقض آنان موجبات بطلان بیع را فراهم نماید . به موجب اصل آزادی قراردادها تا محدودیتی به صراحت وجود نداشته باشد اراده طرفین بر قرارداد حاکم می‌باشد .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;طرفین همچنین می‌توانند قیودات و شروطی برای نحوه فروش و اخطار قصد فروش در قرارداد درج نمایند .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;نکته بسیار مهمی که باید در این جا مورد اشاره قرار گیرد این است که اصل آزادی قرارداد ها امکان اجرای نهاد فروش خودیاری را در قراردادهای دیگر را نیز به طرفین می‌دهد .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در خصوص این نهاد باید گفت که در واقع بازفروش اختیاری نوعی فروش خودیاری می‌باشد ، که با توجه به وضعیت نهاد بیع به صورت بازفروش ( اختیاری ) در آمده است ، این نهاد قابلیت اعمال در قرارداد های دیگر را نیز دارد .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;مثلاً می توان در عقد اجاره شرط کرد در صورتی که مؤجر از پرداخت پول پیش خودداری کرد مستأجر حق داشته باشد تا با فروش عین مستأجره طلب خود را وصول نماید .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;البته در هر مورد باید الزامات قانونی و مقتضای ذات هر نهاد مورد توجه قرار گیرد .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;بند دوم : اصل آزادی قراردادی در بازفروش اجباری&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در خصوص بازفروش اضطراری در صورتی که ضمن قرارداد شرط شود که اگر کالا در معرض تضییع قرار گرفت ، طرفی که کالا را در اختیار دارد مکلف است کالا را به فروش رساند&lt;sup&gt;[۱۹۰]&lt;/sup&gt;۱ .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;به نظر می‌رسد که بتوان بر اساس اصل آزادی قراردادها این شرط را توجیه کرد ، چرا که بر اساس این اصل ، اراده قراردادی طرفین آزاد است تا هر شرط یا تکلیفی را در قرارداد درج کنند مگر با مانع قانون یا مقتضای ذات عقد برخورد نماید ، که به نظر نمی رسد که این شرط خلاف قانون یا خلاف مقتضای ذات عقد بیع باشد .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بر اساس اصل آزادی قرارداد ها طرفین در تعیین وضعیت هایی که یکی از طرفین مکلف به فروش کالا است آزاد می‌باشند ، اما همان طوری که قبلاً اشاره کردیم چون قانون‌گذار چنین تکلیفی را برای هیچ یک از طرفین قرارداد به صراحت پیش‌بینی نکرده است ، مواردی را که یکی از طرفین ( کسی که کالا را در اختیار دارد ) مکلف به فروش کالا می‌باشد باید در قرارداد به صراحت پیش‌بینی و شمارش شود و نباید به صورت کلی فقط قید شود که چنین تکلیفی وجود دارد .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;طرفین همچنین می‌توانند قیودات و شروطی برای نحوه فروش و اخطار قصد فروش در قرارداد درج نمایند .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;نکته بسیار مهمی که باید در این جا مورد اشاره قرار گیرد این است که اصل آزادی قرارداد ها امکان اجرای نهاد فروش اضطراری را در قرارداد های دیگر را نیز به طرفین می‌دهد .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در خصوص این نهاد باید گفت که در واقع بازفروش اجباری نوعی فروش اضطراری می‌باشد ، که با توجه به وضعیت نهاد بیع به صورت بازفروش ( اجباری ) در آمده است ، این نهاد قابلیت اعمال در قرارداد های دیگر را نیز دارد ، مثلاً می توان در عقد اجاره شرط کرد در صورتی که عین مستأجره در معرض ضایع شدن قرار گرفت مستأجر مکلف باشد که عین مستأجره را به فروش رساند .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;البته در هر مورد باید الزامات قانونی و مقتضای ذات هر نهاد مورد توجه قرار گیرد .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;مبحث دوم : بازفروش اجباری در حقوق ایران&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بازفروش اجباری نهادی است که از یک تکلیف قانونی تشکیل می شود ، این نهاد برعکس بازفروش اختیاری که فقط دفع ضرر از یک طرف را مورد توجه قرار داده ، بر مبنای دفع ضرر از دو طرف استوار است . برای شناختن کامل این نهاد ، شناخت پایه های تشکیل دهنده آن بسیار مهم و اساسی می‌باشد .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;وجود چهار شرط در این نهاد ضروری به نظر می‌آید ، که به ترتیب عبارتند از :&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۱ ) نهاد پایه ۲ ) تسلط ( استیلاء ) ۳ ) وضعیت ۴ ) وسیله&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;منظور از نهاد پایه قرارداد بیع می‌باشد که جزء اعمال حقوقی است و در واقع این نهاد است که پایه ای برای ایجاد رابطه میان دو طرف می‌گردد که در نهایت به تحمیل تکلیف منتهی می شود .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;دومین شرط برای تحقق این نهاد تسلط شخصی بر مال دیگری است ، البته این استیلاء باید قانونی باشد ، نکته دیگر این که حبس بودن مال در این جا مبنا نمی باشد یعنی ضرورتی ندارد که مال در دست دیگری حبس باشد .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;وجود وضعیت فوق العاده عامل اصلی پیدایش این نهاد می‌باشد ، چرا که تا این وضعیت پیش نیاید نگهدارنده کالا مکلف به فروش نیست ، پس باید وضعیت از حالت عادی خارج شود .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;وسیله ای که در این نهاد به کار می رود همان طوری که از نام نهاد مشخص است فروش می‌باشد و دفع ضرر در این نهاد فقط باید به وسیله فروش صورت گیرد .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;فروش اضطراری هر چند در وضعیت فوق العاده و برای دفع ضرر از مالک کالا به کار می رود اما به هر حال استثنایی بر اصل ممنوع بودن فروش مال غیر محسوب می‌گردد ، اصلی که در حقوق ایران کاملاً استوار است و بازفروش اضطراری که خلاف آن است در حقوق ایران نیاز به اثبات دارد .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;به همین منظور ما در این بخش به ترتیب نهاد اداره فضولی مال غیر و فروش اضطراری توسط متصدی حمل و نقل و فروش اضطراری توسط حق العمل کار و فروش اضطراری مال در حبس را جداگانه بررسی و مقایسه کرده و با توجه به نتایج حاصله از مقایسه به جمع بندی مطالب می پردازیم .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;گفتار اول : اداره مال غیر&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;به موجب ماده ۳۰۶ قانون مدنی « اگر کسی اموال غایب یا محجور و امثال آن ها را بدون اجازه مالک یا کسی که حق اجازه دارد اداره کند باید حساب زمان تصدی خود را بدهد . در صورتی که تحصیل اجازه در موقع مقدور بوده یا تأخیر در دخالت موجب ضرر نبوده است ، حق مطالبه مخارج نخواهد داشت . ولی اگر عدم دخالت یا پرهیز در دخالت موجب ضرر صاحب مال باشد دخالت کننده مستحق اخذ مخارجی خواهد بود که برای اداره کردن لازم بوده است » .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;مقصود از اداره ی مال غیر ( ماده ۳۰۶ قانون مدنی ) عملیاتی است که برای حفظ و جلوگیری از تضییع اموال شخص غایب ( ناتوان ) در شرایط خاص از سوی شخصی که هیچ سمتی ندارد صورت می‌گیرد و در صورتی که برای عملیات انجام شده مخارجی هزینه نماید در صورت تحقق شرایط ، وی مستحق مخارجی که کرده می‌باشد .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در خصوص این نهاد دو نظر کلی وجود دارد ، گروه اول آن را امری اختیاری و از باب احسان می دادنند و گروه دوم آن را یک تکلیف و برای تحلیل آن از قاعده حسبه استفاده می‌کنند . به همین منظور ما این قسمت را در دو بخش مورد بررسی قرار می‌دهیم :&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;بند اول : اختیاری بودن اداره مال غیر&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;item_footer&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;small&gt;&lt;a href=&quot;https://nin.kowsarblog.ir/مقالات-و-پایان-نامه-ها-بند-دوم-اصل-آزادی-قراردادی-در-بازفروش-اجباری-nn9&quot;&gt;مطلب اصلی&lt;/a&gt; در &lt;a href=&quot;http://kowsarblog.ir/&quot;&gt;کوثربلاگ &lt;/a&gt;ارسال شده است.&lt;/small&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;</description>
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			<title>&#34; دانلود پایان نامه و مقاله – قسمت 27 – 8 &#34;</title>
						<description>&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;
&lt;div id=&quot;story&quot; class=&quot;story&quot; data-id=&quot;1557094169&quot; data-words=&quot;1133&quot;&gt;
&lt;div&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;اولاً – درخواست تعمیر باید با توجه به اوضاع و احوال، غیر معقول نباشد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics_22_50.png&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ثانیاًً – مشتری مسئله تعمیر را از طریق اخطاری که توصیف آن در ماده ۳۹ آمده است یا ظرف مدت معقولی پس از آن تقاضا کرده باشد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;برخی حقوق ‌دانان اعتقاد دارند تعمیر بر دو نوع است : تعمیر مادی و تعمیر معنوی . چنانچه کالایی به علت وجود حق شخص ثالثی در رهن یا توقیف باشد با فک رهن و آزاد کردن کالا مبادرت به تعمیر معنوی آن می‌شود . لذا بند ۳ ماده ۴۶ در برگیرنده هر دو نوع تعمیر می‌باشد . (جمعی از نویسندگان، ۱۳۷۴:۱۷۵) (سماواتی، ۱۳۸۹ : ۶۹)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بند پنجم- اعطای مهلت اضافی&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بند ۱ ماده ۴۷ کنوانسیون مقرر می‌دارد : «خریدار می‌تواند به فروشنده مهلتی اضافی و معقول بدهد تا نسبت به ایفای تعهدات خود عمل کند.»&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ژان پیرپلانتار می‌گوید قاعده مذکور در ماده ۴۷ در بسیاری سیستم‌های حقوقی بی سابقه است و از حقوق آلمان (Nachfrist) نشئت گرفته است . لکن به نظر می‌رسد که ماده ۱۴۵۴ قانون مدنی ایتالیا (Codice civile) نیز همین قاعده را بیان می‌کند . بر طبق این ماده طرف بی تقصیر می‌تواند زمان معقولی را برای اجرای قرارداد توسط طرف دیگر تعیین و اعلام کند چنانچه در مدت تعیین شده قرارداد اجرا نشود قرارداد خاتمه یافته است .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;https://nefo.ir/&quot;&gt; &lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/THESIS-PAPER-10.png&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;نکته‌ای که مهم است این است که در صورتی که مشتری مهلت مشخص یا معقولی به بایع بدهد، دیگر حق استفاده از طرق دیگر جبران خسارت را ندارد . البته این محرومیت مطالبه خسارت ناشی از تأخیر در ایفای تعهد را شامل نمی‌شود . (صفایی و همکاران، ۱۳۹۰ : ۱۵۹)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بند ششم- تقلیل ثمن کالا&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بر طبق ماده ۵۰ کنوانسیون چنانچه کالای تسلیم شده مطابق با قرارداد نباشد، چه قیمت کالا قبلاً تأدیه شده باشد و چه نشده باشد، خریدار با توجه به نسبت تفاوت ارزش کالای تسلیم شده در روز تسلیم و ارزشی که کالای منطبق با قرارداد در زمان تسلیم دارا می‌باشد قیمت کالا را تقلیل دهد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;البته این در صورتی است که:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;اولاً : فروشنده چنانچه کالا را قبل از رسیدن موعد تسلیم کرده باشد قصور خود را در ایفای تعهدات خویش جبران نکند .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ثانیاًً : خریدار از پذیرش و انجام تعهد فروشنده نسبت به رفع نواقص و کاستی‌های کالایی که قبل از موعد تسلیم شده استنکاف ورزد . (صفایی و همکاران، ۱۳۹۰ : ۱۶۹) (شیروی، ۱۳۹۰ :۱۹۹)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بند هفتم- ابطال قرارداد&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در دو صورت خریدار می‌تواند قرارداد را ابطال کند :&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;الف) عدم انجام هر یک از تعهدات فروشنده موجب نقض اساسی قرارداد شده باشد . ماده ۲۵ کنوانسیون نقض اساسی قرارداد را آن نقضی می‌داند که باعث ورود چنان خسارتی به طرف دیگر قرارداد شود که وی را از آنچه که توقع داشته است به موجب قرارداد به دست بیاورد به طور اساسی محروم کند .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ب) عدم تسلیم کالا – چنانچه بایع در خلال مدت اضافی که طبق بند ۱ ماده ۴۷ توسط مشتری تعیین شده است، کالا را تسلیم نکند یا اعلام نماید که ظرف مهلت مذبور کالا را تسلیم نخواهد کرد، مشتری می‌تواند قرارداد بیع را ابطال کند . (دکتر حسین خزاعی، ۱۳۸۶ : ۲۲۲) (دکتر انصاری معین، ۱۳۸۷ : ۱۹۵)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;گفتار ششم- بایع و روش‌های جبران خسارت حاصله از نقض قرارداد توسط مشتری&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در معاملات بین‌المللی یکی از مواردی که باید مورد توجه قرار گیرد حقوق بایع در مقابل خساراتی است که بر اثر نقض قرارداد توسط مشتری متوجه وی می‌گردد .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بر طبق کنوانسیون بیع بین‌المللی کالا بایع در جبران خسارت ناشی از نقض قرارداد توسط مشتری می‌تواند به یکی از روش‌های ذیل تمسک جوید:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بند اول-اجرای اجباری تعهد:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ماده ۶۲ کنوانسیون مقرر می‌دارد که : «فروشنده می‌تواند از خریدار پرداخت قیمت کالا، قبض کالا یا انجام دیگر تکالیف وی را مطالبه کند، مگر اینکه به جبران خسارتی متوسل شود که با مطالبه درخواست وی متناسب نباشد.»&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بر طبق ماده ۲۸ چنانچه یکی از طرفین قرارداد اجرای تعهدی را از طرف دیگر بخواهد محکمه مکلف به صدور حکم به اجرای عین تعهد نیست، مگر اینکه بر طبق قانون متبوع خود نسبت به قراردادهای بیع مشابهی که مشمول مقررات کنوانسیون نیستند، حکم به اجرای عین تعهد دهد .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بند دوم- اعطای مهلت اضافی به مشتری&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بایع می‌تواند اعطای مهلت اضافی نماید تا نسبت به انجام تکالیف خود اقدام کند .چنانچه مشتری این مهلت اضافی را طی یادداشتی رد نکند، وی نمی‌تواند در طول مهلتی که به خریدار اعطاء ‌کرده‌است متوسل به یکی از روش‌های جبران خسارت گردد . (سماواتی، ۱۳۸۹ : ۷۹) (جمعی از نویسندگان، ۱۳۷۴ : ۳۲۸)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بند سوم- ابطال قرارداد&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بایع حق دارد در موارد ذیل قرارداد بیع را ابطال کند :&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;چنانچه عدم انجام هر یک از تکالیف مشتری بر طبق کنوانسیون، نقض اساسی قرارداد قلمداد شود .&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;در صورتی که خریدار طی مهلت اضافی نسبت به پرداخت ثمن کالا یا قبض کالا اقدام نکند .&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt;البته اگر مشتری قیمت کالا را پرداخت کرده باشد، بایع نمی‌تواند قرارداد را باطل کند مگر اینکه :&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;اولاً : قرارداد را پس از تأخیر مشتری در تأدیه ثمن و قبل از آگاهی از ایفای این تعهد باطل اعلام کرده باشد ؛&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ثانیاًً : زمانی می‌تواند قرارداد را باطل اعلام کند که مشتری یکی از تعهدات خود را نقض کرده باشد (البته به غیر از تأخیر در ایفای تعهد) . وی باید ظرف مدت معقولی پس از آنکه نسبت به نقض، اطلاع حاصل کرد یا باید اطلاع پیدا می‌‌کرده‌است، یا پس از پایان پذیرفتن مهلت اضافی که بر طبق بند ۱ ماده ۶۳ به وسیله وی تعیین شده است، یا بعد از اعلام خریدار مبنی بر اینکه ظرف مهلت اعطایی از سوی فروشنده نسبت به ایفای تعهدات خود اقدام نخواهد کرد، قرارداد را باطل اعلام کند . (جمعی از نویسندگان، ۱۳۷۴ : ۳۳۲)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بند چهارم- اقدام در مقابل قصور مشتری در تعیین کیفیت، کمیت و دیگر مشخصات کالا&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;طبق ماده ۶۵ کنوانسیون در صورتی که برحسب قرارداد، این تکلیف خریدار باشد که شکل، اندازه یا دیگر مشخصات کالا را تعیین کند و وی پس از سپری شدن تاریخ معین یا زمان متعارف که فروشنده تقاضای مشخص نمودن موارد فوق را ‌کرده‌است در این امر کوتاه کند، فروشنده بدون اینکه به دیگر حقوق وی لطمه‌ای وارد شود خود می‌تواند مشخصات کالا را مطابق درخواست‌های مشتری که ممکن است بر او معلوم باشد، تعیین کند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;البته در صورتی که فروشنده مبادرت به تعیین مشخصات کالا بنماید باید جزئیات آن را به اطلاع خریدار برساند و مدت معقولی را تعیین کند تا مشتری فرصت اعلام مشخصات متفاوت ‌در مورد کالا را داشته باشد. در صورتی که مشتری پس از انقضای مهلت مذبور اقدامی صورت ندهد مشخصات تعیین شده از سوی فروشنده لازم الاتباع است . (دکتر سماواتی، ۱۳۸۹ : ۸۰) (جمعی از نویسندگان، ۱۳۷۴ : ۳۶۲)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بخش دوم کنوانسیون درباره خسارت ناشی از عدم انجام تعهد است که در ماده ۷۴ آمده است: «خسارات ناشی از نقض قرارداد توسط احد از طرفین شامل مبلغی برابر با ضرر، که در برگیرنده عدم النفع نیز می‌شود، است که طرف دیگر به عنوان نتیجه نقض متحمل می‌گردد.&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;item_footer&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;small&gt;&lt;a href=&quot;https://nin.kowsarblog.ir/دانلود-پایان-نامه-و-مقاله-n-قسمت-27-nn8&quot;&gt;مطلب اصلی&lt;/a&gt; در &lt;a href=&quot;http://kowsarblog.ir/&quot;&gt;کوثربلاگ &lt;/a&gt;ارسال شده است.&lt;/small&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;</description>
			<link>https://nin.kowsarblog.ir/دانلود-پایان-نامه-و-مقاله-n-قسمت-27-nn8</link>
							</item>
				<item>
			<title>&#34; دانلود متن کامل پایان نامه ارشد | ، پژوهش نامه ی متین، – 10 &#34;</title>
						<description>&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;
&lt;div id=&quot;story&quot; class=&quot;story&quot; data-id=&quot;1557107066&quot; data-words=&quot;927&quot;&gt;
&lt;div&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. قصد تبرّع : قصد کمک رسانی بدون انتظار جبران. ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. ناصر، کاتوزیان (۱۳۸۱)، قانون مدنی در نظم حقوقی کنونی، چاپ هفتم، تهران: انتشارات میزان، ص ۲۶۴، حاشیه ی ماده ی ۳۰۶، ش ۱۹٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. بلیندا، بینت، منبع پیشین، ص ۵۳٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. دی. جی. اسکیج، به نقل از محمود عباسی، منبع پیشین، ص ۲۹۶٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/zyro-image.png&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. رضا، نوربها، به نقل از محمود عباسی، منبع پیشین، ص ۲۹۸٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. لرد، گوف، به نقل از بلیندا بینت، منبع پیشین، ص ۵۳٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. برای اطلاع بیشتر ر.ک. لینن و همکاران، منبع پیشین، صص ۵۰- ۶۲٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;https://nefo.ir/&quot;&gt; &lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/%D9%82%D9%82%D9%82%D9%82%D9%82%D9%82%D9%82%D9%82%D8%AB.png&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. ساواتیه، به نقل از محمود عباسی، منبع پیشین، ص ۲۹۸٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. لینن و همکاران، منبع پیشین، ص ۷۲٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. سیاوش، شجاع پوریان، منبع پیشین، ص ۲۴۸٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. فرامرز، گودرزی، منبع پیشین، ص ۵۵٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. سید محمد، فاطمی، رضایت مکنون، ‌فصل‌نامه ی باروری و ناباروری، سال ۱۳۸۹، شماره ی ۴، صص ۳۳- ۳۸٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. محمود، عباسی(۱۳۸۹)، مسئولیت پزشکی، چاپ دوم، تهران: انتشارات حقوقی، ص ۲۹۴٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. سوره ی توبه: آیه ی ۹۱٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. سید محمد، موسوی بجنوردی (۱۳۸۱)، مسئولیت کیفری و مدنی پزشک&lt;strong&gt;، پژوهش نامه ی متین،&lt;/strong&gt; ش ۱۴، بهار۸۱، ۵- ۳۴٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. محمدبن یعقوب، کلینی(۱۴۱۳)، اصول کافی. ج ۶، بیروت: دارالاضواء، ص ۴۸٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. سید محمد، موسوی بجنوردی، منبع پیشین. ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. بلیندا، بینت، منبع پیشین، ص ۵۳٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. محمود، عباسی(۱۳۸۹)، مسئولیت پزشکی، چاپ دوم، تهران: انتشارات حقوقی، ص ۳۰۵٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;.محمود، عباسی، همان منبع، ص ۲۹۹٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. سید مصطفی، محقق داماد، منبع پیشین، ص ۱۶۳٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. مرتضی، آموزگار(۱۳۸۸)، تعقیب کیفری و انتظامی پزشک مقصر، انتشارات مجد، تهران، چاپ دوم، ص۱۱۹٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. سیاوش، شجاع پوریان، منبع پیشین، ص ۲۴۹٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. محمود، عباسی، منبع پیشین، ص۳۰۲٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. لینن و همکاران، منبع پیشین، ص ۵۲٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. همان، ص ۵۴٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. همان، ص ۵۶٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. همان، ص ۶۱٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. علیرضا، اسماعیل آبادی(۱۳۸۳)، شرط برائت در قرارداد پزشک با بیمار، پایان نامه کارشناسی ارشد حقوق خصوصی، دانشگاه مفید قم. ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. بلیندا، بینت، منبع پیشین، ص ۸۲ . ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. همان منبع، ص۵۹٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. همان منبع، ص۸۴٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. لینن و همکاران، منبع پیشین، ص ۶۵٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. حسن، عمید، فرهنگ فارسی، انتشارات امیر کبیر، تهران، چاپ بیست و یکم، ۱۳۶۱، ص۶۳۲٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. محمد جعفر، جعفری لنگرودی، ترمینولوژی حقوق، انتشارات گنج دانش، تهران، چاپ نوزدهم، ۱۳۸۷٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. مهدی، شهیدی، تشکیل قراردادها و تعهدات، جلد اول، انتشارات مجد، تهران، چاپ ششم، ۱۳۸۶، ص ۱۳۰٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. جلیل، قنواتی؛ سید حسن، وحدتی شبیری و ابراهیم، عبدی‌پور، حقوق قراردادها در فقه امامیه، زیر نظر سید مصطفی محقق داماد، ج ۱، تهران: انتشارات سمت، ۱۳۷۹، ص ۲۳۱٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. حسن، جعفری تبار(۱۳۷۷)، از آستین طبیبان، قولی در مسئولیت مدنی پزشکان، مجله ی دانشکده ی حقوق و علوم سیاسی تهران، شماره۴۱، صص ۵۵- ۸۱٫، ص ۶۲٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. علیرضا، پارسا پور و همکاران، منبع پیشین. ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. Event Model ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. Process Model ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. علیرضا، پارسا پور و همکاران، منبع پیشین. ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;۲٫ Royall College of Nursing (RCN), Research ethics, London; 2005: 002013, P: 4-9. ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. محمود، عباسی(۱۳۸۹)، مسئولیت پزشکی، چاپ دوم، تهران: انتشارات حقوقی، ص۲۲۷٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. سیاوش، شجاع پوریان، منبع پیشین، ص ۸۲٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. محمود، عباسی، منبع پیشین، ص ۲۲۴٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. سید مصطفی، محقق داماد، منبع پیشین، ص۱۵۱٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. ابوالحسن، محمدی، مبانی استنباط حقوق اسلامی یا اصول فقه، منبع پیشین، ص ۲۲۶٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. قیس بن محمد، آل شیخ مبارک، منبع پیشین، ص ۱۶۱٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. سید محمدزمان، دریاباری، منبع پیشین. ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. شخصی که جنایت نسبت به او واقع شده است. ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;&lt;sup&gt;۴&lt;/sup&gt;.Express Consent ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;&lt;sup&gt;۵&lt;/sup&gt;.Implied Consent ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;&lt;sup&gt;۶&lt;/sup&gt;.Consent In Special Cases ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. بهنام، بهنوش، تفاوت رضایت و برائت، مقاله ی ارائه شده به سومین سمینار اخلاق پزشکی سازمان نظام پزشکی، صص۱- ۳٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. لینن و همکاران، منبع پیشین، ص۶۶٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;&lt;sup&gt;۱&lt;/sup&gt;. Royal College of Nursing, Op, Cit, P: 43-50. ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;&lt;sup&gt;۲&lt;/sup&gt;. Implied consent ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. هنک، لینن و همکاران، منبع پیشین، صص ۶۵ و ۵۴٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;&lt;sup&gt;۴&lt;/sup&gt;.Delayed Consent ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;&lt;sup&gt;۵&lt;/sup&gt;. Royal College of Nursing, Op, Cit, P: 50. ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. مهدی، شهیدی، منبع پیشین، ص ۱۴۴٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. مارشال، دیوید، به نقل از محمود عباسی، مسئولیت پزشکی، پیشین، ص ۲۷۷٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. حسین، آقائی نیا، به نقل از محمود عباسی ، همان، ص ۲۷۸٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. رضا، نوربها، به نقل از محمود عباسی، همان. ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. محمد علی، جوادی؛ محمود، عباسی و حسین، ضیائی(۱۳۸۶). اخلاق پزشکی و انتظار بیمار از پزشک، چاپ اول، تهران: انتشارات گنج دانش، ص ۵۷٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. سیاوش، شجاع پوریان، منبع پیشین، ص ۸۵٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. مرتضی، آموزگار، منبع پیشین، ص۱۲۰٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. برای اطلاع بیشتر ر.ش به لینن و همکاران، منبع پیشین، صص۴۷-۶۶٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;۳٫ Basic Consent ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;&lt;sup&gt;۱&lt;/sup&gt;. Kelly A. Edwards, Op, Cit, P: 10. ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. سیاوش، شجاع پوریان، منبع پیشین، ص۲۴۷٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. سیاوش، شجاع پوریان، پیشین، ص ۱۱۰٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. محمد علی، جوادی، منبع پیشین، ص ۸۵٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. قیس بن محمد، آل شیخ مبارک، پیشین، ص ۲۲۵٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. محمود، عباسی، پیشین، ص ۲۹۰٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. باقر، لاریجانی، پیشین، ج اول، ص ۲۷٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. سید مصطفی، محقق داماد، پیشین، صص ۱۵۵-۱۵۰٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. همان منبع، ص ۱۵۴٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. ناصر، کاتوزیان؛ حسن، جعفری تبار؛ ایرج گلدوزیان؛ سید مرتضی، قاسم زاده و محمد هادی ، صادقی، به نقل از سیاوش، شجاع پوریان، پیشین، ص ۱۸۰٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. همان منبع، ص ۱۸۳٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. برای اطلاع بیشتر ر. ک مرتضی، آموزگار، پیشین، صص ۱۶۰- ۹۵٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;۱٫ Euthanasia ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. بابک، فرحی، ۱۳۸۴، تقریرات درس حقوق جزای اختصاصی، تهران: مؤسسه ی طرح نوین، ص ۵۴٫ ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;item_footer&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;small&gt;&lt;a href=&quot;https://nin.kowsarblog.ir/دانلود-متن-کامل-پایان-نامه-ارشد-پژوهش-نامه-ی-متین-nn10&quot;&gt;مطلب اصلی&lt;/a&gt; در &lt;a href=&quot;http://kowsarblog.ir/&quot;&gt;کوثربلاگ &lt;/a&gt;ارسال شده است.&lt;/small&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;</description>
			<link>https://nin.kowsarblog.ir/دانلود-متن-کامل-پایان-نامه-ارشد-پژوهش-نامه-ی-متین-nn10</link>
							</item>
				<item>
			<title>&#34; فایل های مقالات و پروژه ها – ابراز وجود:تعریف و مولفه های آن – 2 &#34;</title>
						<description>&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;
&lt;div id=&quot;story&quot; class=&quot;story&quot; data-id=&quot;1557123519&quot; data-words=&quot;1079&quot;&gt;
&lt;div&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;مطالعات متعددی رابطه بین سوء مصرف مواد و دیگر اختلالات روانپزشکی را مورد بررسی قرار داده‌اند.یافته های این پژوهش ها همگی نشان دهنده همپوشی گسترده و متنوع بین سوء مصرف مواد و اختلالات روانپزشکی است.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;شمار قابل ملاحضه ای از بیمارانی که در اتاق های اضطراری پذیرش می‌شوند،سوء مصرف کنندگان مواد هستند و بیش از یک سوم پذیرش های روانپزشکی عمومی مشکلاتی دارند که یا متاثر از سوء مصرف مواد است و یا از آن طریق تشدید شده اند.همچنین سوء مصرف مواد در میان بیماران بستری روانپزشکی پدیده ای شایع محسوب می‌گردد و از سوی دیگر اختلالات روانپزشکی شیوع بالایی در میان سوء مصرف کنندگان دارند.(گلاندر&lt;sup&gt;[۸۱]&lt;/sup&gt; و کاستاندا&lt;sup&gt;[۸۲]&lt;/sup&gt;،۱۹۹۱)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/zyro-image.png&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;از لحاظ تشخیص،تمایز بین اختلالات روانپزشکی و سوء مصرف مواد کار دشواری می‌باشد.برای مثال،تشخیص اولیه یا ثانویه بودن اختلالات خلقی در کسانی که مبتلا به سوء مصرف طولانی مدت هستند،به علاوه تشخیص و تمابز بین اختلال شخصیت ضد اجتماعی از اختلالات رفتاری ناشی از سوء مصرف مواد و یا شناسایی و تشخیص الگوهای خود-درمانی از سندرم های روانپزشکی کاری بس دشوار است.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;https://fekreshad.ir/&quot;&gt; &lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/THESIS-PAPER-13.png&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در یک تحقیق پیمایشی که توسط رگیر&lt;sup&gt;[۸۳]&lt;/sup&gt; و همکاران(۱۹۹۱) روی بیش از بیست هزار آمریکایی انجام گرفته است،نشان می‌دهد که افراد مبتلا به بیماری های روانی ۷/۲مرتبه بیش از افراد فاقد اختلالات روانی احتمال دارد که مشکلات مربوط به الکل یا سایر مواد را بروز دهند.در واقع ۳۷درصد از افرادی که مبتلا به سوء مصرف مواد بودند،اختلالات روانپزشکی توام محور ۱ را نیز داشتند.(رگیر و همکاران۱۹۹۶).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در تحقیق پیمایشی وسیع دیگری گزارش شد که ۷۶ درصد مردها و ۶۵درصد زن هایی که تشخیص سوء مصرف مواد را دریافت کرده‌اند،یک تشخیص روانپزشکی دیگر نیز داشته اند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;شایع ترین اختلالات روانی توام در این تحقیق اختلالات شخصیت ضد اجتماعی،اختلالات اضطرابی واختلالات خلقی گزارش شده است.(کاپلان،۱۹۹۷).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;،میزان شیوع اختلالات در طول عمر را برای بیماران وابسته به افیون آن ها ۵۴ درصد افسردگی،۵/۳۴درصد الکلیسم،۵/۲۶درصد اختلال شخصیت ضد اجتماعی،۱۹درصد اختلال افسردگی تناوبی،۵/۱۶ درصد اختلال شخصیت مرزی،۶/۹درصد فوبی،۴/۸درصد اختلال شخصیت اسکیزوتایپال،۴/۸درصد اختلال افسردگی خفیف،۶/۶درصد هیپومانی و ۴/۵درصد اختلال اضطراب تعمیم یافته گزارش کرده‌اند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در میان مردان۴۹درصد اختلال شخصیت ضد اجتماعی بیشترین تشخیص را در این نمونه نشان می‌دهد. و پس از آن سوء مصرف یک ماده دیگر با۴۵درصد،اختلال افسردگی اساسی با ۳۲درصد و فوبی با ۲۰درصد به ترتیب بیشترین فراوانی را داشتند.در میان زنان افسردگی با ۵۳درصد بیشترین فراوانی تشخیص را دریافت ‌کرده‌است و پس از آن به ترتیب فوبی با ۴۴درصد،سوء مصرف یک ماده دیگر با ۳۸درصد،اختلال شخصیت ضد اجتماعی با ۲۰درصد در رتبه های بعدی قرار داشتند.از جمله تشخیص هایی که در هر دو گروه فراوانی کمتری داشتند اختلال هراس با ۱۰درصد،مانیا با ۴درصد و اسکیزوفرنی با ۲درصد گزارش شده اند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;کاپلان(۱۹۹۷) گزارش می‌کند که در مطالعات متعدد تقریبا بین۳۵ تا۶۰ درصد افراد واجد تشخیص سوء مصرف مواد یا وابستگی مواد تشخیص اختلال شخصیت ضد اجتماعی را نیز دریافت می‌کنند.پیتز و دیگران نیز در مطالعاتی ‌به این نتیجه رسیده اند که افراد مبتلا به اختلال شخصیت ضد اجتماعی نسبت به همه اختلالات روانپزشکی در محور ۱ و۲نمرات بالاتری در مقیاس های سوء مصرف مواد دریافت می‌کنند&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;اختلال شخصیت ضد اجتماعی مشکلی بسیار جدی در میان سوء مصرف کنندگان مواد است.چنین تصور می شود که این اختلال شخصیت ضد اجتماعی است که به عنوان یک عامل خطر احتمالی ابتلاء فرد را به سوء مصرف مواد افزایش می‌دهد.چرا که الگوهای رفتاری این اختلال اغلب در دوره کودکی و نوجوانی شروع می شود و معمولا قبل از اینکه در بزرگسالی واجد تشخیص اختلال شخصیت ضد اجتماعی شوند در سنین زیر ۱۸سال تشخیص اختلال رفتار دریافت نموده اند یا حداقل واجد ملاک های چنین تشخیصی بوده اند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;اختلالات شخصیت مرزی بعد از اختلال شخصیت ضد اجتماعی بیشترین برافراشتگی را در مقیاس های سوء مصرف مواد دارا است.افراد مبتلا به اختلال شخصیت مرزی عموما سابقه سوء مصرف مواد دارند و ملاک های تشخیصی سوء مصرف مواد را دارا هستند..&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۸۵ درصد از افرادی که در پژوهش آن ها تشخیص اختلال شخصیت مرزی دریافت کرده‌اند،در دوره هایی از زندگی خود واجد ملاک های تشخیصی سوء مصرف انجام شده،نشان می‌دهد که ۶۶درصد آن ها واجد ملاک های اختلال شخصیت مرزی نیز هستند. یک یک سوم سوء مصرف کنندگان مواد تعداد زیادی از صفات اختلال شخصیت مرزی را نشان می‌دهند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;یکی از متغیر های پژوهش حاضر مربوط به ابراز وجود می‌باشد.در این پژوهش ابراز وجود متغیر وابسته ما می‌باشد با توجه به اهمیت این متغیر در این تحقیق در ادامه به توضییح این متغیر می پردازیم.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ابراز وجود:تعریف و مؤلفه‌ های آن&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ابراز وجود هسته رفتار بین فردی و کلید روابط انسانی به ویژه در جوامع فرد گرا است(جرالد و گاتوس،۱۹۹۹؛نقل از هارجی&lt;sup&gt;[۸۴]&lt;/sup&gt; و دیکسون&lt;sup&gt;[۸۵]&lt;/sup&gt;،۲۰۰۸).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ابراز وجود به توانایی فرد در بیان و دفاع از عقاید،علاقه مندی ها و احساسات خود به نحوی شایسته و بدون اضطراب اطلاق می شود(ولپی&lt;sup&gt;[۸۶]&lt;/sup&gt;،۱۹۷۳نقل از حاج حسنی ۱۳۸۳)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ابراز وجود شکلی از ارتباطات است که به عنوان حمایت شخص از حقوق شخصی اش بدون نادیده گرفتن و یا تخریب حقوق دیگران تلقی می شود.در رفتار ابراز وجود فرد به بیان تفکرات،احساسات و باورها به شکلی مستقیم و صادق می پردازد.ابراز وجود سبب ایجاد توانایی در پایه گذاری روابط بین شخصی سالم به عنوان یک مهارت اجتماعی می شود.‌بنابرین‏ ابراز وجود به عنوان یک مهارت اجتماعی نقشی مهمی را در روابط اجتماعی بازی می‌کند(کپاران&lt;sup&gt;[۸۷]&lt;/sup&gt; و همکاران،۲۰۰۹،نقل از ملک پور،۱۳۸۳).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;توانایی اکتسابی ابراز وجود احساسات و برتری های فرد او را قادر می‌سازد به نفع خود عمل کند،بدون هر گونه اضطرابی روی پای خود بایستد احساسات واقعی خود را صادقانه ابراز نماید و با توجه به حقوق دیگران حق خود را بگیرد و به حقوق و شخصیت دیگران نیز احترام بگذارد(البرتی&lt;sup&gt;[۸۸]&lt;/sup&gt; و امونز&lt;sup&gt;[۸۹]&lt;/sup&gt;،۱۹۸۲نقل از ساندرز،۲۰۰۰).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;طبق دیدگاه های متداول در جامعه فرد گرا،رفتار ابراز وجود مندانه منجر به ایجاد تساوی در ارتباطات انسانی می‌گردد و فرد را قادر می‌سازد تا بر اساس علایقش عمل کتد(آلبرتی وامونز،۲۰۰۱،نقل از هارجی و دیکسون،۲۰۰۸).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;به اعتقاد لانگ&lt;sup&gt;[۹۰]&lt;/sup&gt; و جاکوبوسکی&lt;sup&gt;[۹۱]&lt;/sup&gt;(۱۹۷۲،نقل از هارجی و دیکسون،۲۰۰۸)ابراز وجود شامل اصرار و پافشاری بر حقوق فردی و بیان افکار،احساسات و باورها به صورت مستقیم،صادقانه و به طریقی مناسب است،به گونه ای که به حقوق افراد دیگر نیز احترام گذاشته شود.همچنین ابراز وجود یک ویژگی رفتاری است که مشخصه آن رفتار ‌اجتماعی مثبت به منظور دفاع از حق یا رسیدن به حق است.ابراز وجود را باید به صورت یک طیف در نظر گرفت که در یک سوی آن رفتار منفعلانه و در سوی دیگر رفتار پرخاشگرانه قرار دارد.حالت قاطعانه و تمایل به ابراز وجود،نه تنها ابراز صحیح خشم و تحریکات دیگر را در بر می‌گیرد،بلکه همه نوع احساسات گرم و شدیداً محبت آمیز را نیز شامل می شود(آلبرتی و امونز،۱۳۸۵).&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;
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